समय का सदुपयोग कैसे करना चाहिए-samay ka sadupyog kaise karna chahiye

समय का सदुपयोग कैसे करना चाहिए-samay ka sadupyog kaise karna chahiye


समय का सदुपयोग कैसे करना चाहिए-samay ka sadupyog kaise karna chahiye

 समय का हर क्षण मूल्यवान और बेशकीमती है। जो इसका सदुपयोग करना जानते हैं। अपने जीवन में सफलताओं के द्वार सरलता से खोल पाते हैं। और जो इसका दुरुपयोग करते हैं, वह सफलताओं की श्रंखला के लंबे दंश झेलते रहते हैं। प्रकृति के द्वारा हम सभी को जीवन रूपी निश्चित समय का उपहार मिला है। इसका एक क्षण भी ऐसा नहीं है कि जिस का उपयोग करके अपने भाग्य का निर्माण न कर लिया जाए। और इसका एक पल भी ऐसा नहीं है जो अपने साथ सुनहरे भविष्य को न संवारता हो।

समय को बर्बाद करना ,और इसे व्यर्थ में गवाना जीवन को मात्र पछताने के लिए छोड़ने के समान है।

समय सीमा महत्वपूर्ण होती है

हर कार्य की एक निश्चित समय सीमा होती है। समय के अनुरूप कार्य करने पर ही कार्य संपादित होते हैं।और निर्धारित कार्य की समय सीमा बीत जाने पर किए गए कार्य कितने भी अच्छे हो, बेकार हो जाते हैं। जिस तरह फसल सूख जाने के पश्चात पानी के बरसने से कोई लाभ नहीं मिलता है। बाद में पानी फसल के लिए बेकार हो जाता है।

 पानी वही है फसल वही है लेकिन निश्चित समय में उस फसल को पानी नहीं मिल पाया बाद में मिला फिर भी वह उस फसल पर कोई प्रभाव नहीं डाल सका।उसी प्रकार समय की सीमा समाप्त हो जाने के बाद कार्य की पूर्ति अपने महत्व व उपयोगिता को खो देती है।

जिस प्रकार गर्म लोहे को मनचाहे आकार में परिवर्तित किया जा सकता है। लेकिन यदि एक बार भी वह लोहा ठंडा हो जाए, तो फिर उस पर कितना भी प्रहार कर ले लेकिन वह मनचाहे आकार में नहीं ढलेगा।

ठीक इसी प्रकार किसी भी कार्य के लिए निर्धारित समय सीमा महत्वपूर्ण होती है। अवसर महत्वपूर्ण होते हैं। और इन्हें वही लोग प्राप्त कर लेते हैं जो इसका उपयोग करना जानते हैं ,कि कैसे समय का सदुपयोग किया जाता है।

समय के सदुपयोग से लाभ

जिसने समय को साध लिया समय के अनुरूप अपने आप को ढाल लिया। उसने समझ लो अपने जीवन को जीने का मंत्र जान लिया। समय के अनुसार और उसके अनुरूप जीवन को जीना सफल जीवन की ओर अग्रसर होना है।जो व्यक्ति निर्धारित समय पर निर्धारित कार्य को संपन्न करना सीख लेता है, वाह बड़ी आसानी से सफलता की ओर अपने कदम को बड़ा लेता है।

इसके लिए आवश्यक है कि हम अपनी दिनचर्या में जो भी कार्य करना चाहते हैं उसका एक क्रम बना ले। क्योंकि समय के सदुपयोग के साथ निर्धारित कार्य करने वाला व्यक्ति जिंदगी में कभी पीछे नहीं जाता है। सफलता उसके कदम चूमती हैं।

समय प्रबंधन का अर्थ

अपने कार्यों को अपनी क्षमता के अनुसार निर्धारित समय के भीतर पूरा कर लेना, जिससे अनावश्यक तनाव, चिंता ,घबराहट से बचा जा सके। हमारे कार्य समय पर इसलिए पूरे नहीं होते क्योंकि या तो हम अपने कार्य का दायरा बहुत ही बड़ा लेते हैं। या फिर अपने कार्य को टालने की एक प्रवृत्ति बना लेते हैं।कि हमारा कार्य हमेशा अधर में ही लटक कर रह जाता है।

और इसका होश हमें तब आता है जब कार्य की निर्धारित समय सीमा समाप्त हो जाती है।तब कार तो किया जाता है लेकिन हड़बड़ाहट और जल्दबाजी व बेचैनी के साथ।

लोग प्रयास करने के बावजूद समय को प्रबंधित करने में अपने आप को असफल महसूस करते हैं।इसका मुख्य कारण सही ढंग से कार्य की प्राथमिकताओं को तय कर पाने का अभाव है।जब हमें ठीक ढंग से यह समझ नहीं आता कि कौन सा कार्य हमें पहले करना चाहिए और कौन सा बाद में। तो इसके कारण गैर जरूरी कार्य तो हो जाते हैं ।

इसको भी पढ़े -जीवन का लक्ष्य स्वरुप और उसका उद्द्येश्य 

अपना जीवन दूसरों के हित के लिए हो 

लेकिन जरूरी कार्य बाकी रह जाते हैं। और इसका खामियाजा हमें बाद में भुगतना पड़ता है। इसलिए प्राथमिकताएं तय करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि सबसे महत्वपूर्ण कार्य कौन सा है। जिसे हमें पहले करना है और जो बहुत ही जरूरी है।

इसके बाद यह भी ध्यान रखें कि कौन से कार्य वे हैं जिनकी निर्धारित समय सीमा अत्यंत निकट है और उन्हें पूरा करना भी जरूरी है।

कई बार हम इस चीज का आकलन नहीं कर पाते कि कौन सा कार्य करने में हमें कितना समय लगेगा और इसके गलत निर्धारण से भी हमारे अन्य कार्य प्रभावित होते हैं।कभी-कभी हम अपनी क्षमता से ज्यादा कार्यों को करने के लिए राजी हो जाते हैं।

 तैयार हो जाते हैं। लेकिन उन कार्यों को करने के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते हैं। इसलिए वह कार्य अधूरे रह जाते हैं। इसलिए सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए, कि हमारे कार्य करने की गति कैसी है,यदि हमारे कार्य करने की गति धीमी है तो उसके अनुरूप कार्यों को करने की योजना बनानी चाहिए और यदि तेज है तो उसके अनुरूप कार्य की योजना बनाकर कार्य को करना चाहिए।

समय का सदुपयोग करना कोई मुश्किल कार्य नहीं है यह आसान है। बस इसका सही अभ्यास करने की आवश्यकता है।अभ्यास के साथ-साथ अपने आप का निरीक्षण करना वह अपने आप का आकलन करना भी आवश्यक होता है। बेहतर यही है किस समय का सदुपयोग करने के लिए समय को प्रबंधित करें।

समय प्रबंधन करने के लिए नए-नए तरीकों का इस्तेमाल करें और उनको अपनाएं। हमारे पास जो भी करने के लिए कार्य हैं, विकी पहले रूपरेखा बना लेना उत्तम है।यदि कार्य की शुरुआत सुबह से करनी है तो रात में ही इसकी पूरी योजना बना लेनी चाहिए। और सुबह से कार्य को करने के लिए इस पर अमल करना चाहिए।इससे समय की बचत भी होगी और कार्य करने में हड़बड़ी भी नहीं होगी।

कार्य करने में या देखना जरूरी है कि हम कार्य करने के तरीके से परिचित हैं या नहीं हैं। जो कार्य हमने कभी नहीं किया उसे सीखने व करने में अधिक समय लगता है और जो कार्य हम करने के अभ्यस्त हैं। उन्हें पूरा करने में समय कम लगता है।इसलिए कार्यो की रूपरेखा बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पहली बार किए जाने वाले कार्यों को अधिक समय दिया जाए और अभ्यास में आने वाले कार्यों को पर्याप्त समय दिया जाए, जिससे वह अच्छी तरह पूर्ण हो सके।

समय प्रबंधन एक कला है और इसमें निपुणता पाने के लिए इसका सतत अभ्यास जरूरी है। समय के सदुपयोग के माध्यम से ही हम अपने जीवन में उपलब्धियां हासिल कर पाते हैं। इसकी अवहेलना करके इसको नकार करके हम अपने प्राप्त ज्ञान को भी भुला देते हैं। इसलिए अपने समय का सदुपयोग करें और समय के अनुरूप चलने का प्रयास करें जिससे जीवन सफलता की ओर अग्रसर होता रहे।

 

Previous
Next Post »